फिल्म के जरिए निर्देशक यह भी संदेश देते हैं कि आधुनिक समाज कैसे इंसानी शरीर और आत्मा को एक उपभोग की वस्तु बना देता है।
Director Pier Paolo Pasolini, an openly gay Marxist, poet, and intellectual, transposed de Sade’s libertines from 18th-century France to the (1943-1945) – the last fascist stronghold of Benito Mussolini’s regime. Pasolini’s genius (or infamy) was to use de Sade’s pornography as a political metaphor. For Pasolini, the true obscenity was not sex, but the absolute power of fascism that turned human beings into commodities, to be tortured, humiliated, and murdered without consequence. salo or the 120 days of sodom movie in hindi
'सालो' कोई ऐसी फिल्म नहीं है जिसे मनोरंजन के लिए देखा जाए। यह एक कड़वा और असहनीय आईना है, जो समाज को सत्ता की क्रूरता और मानवता के पतन की याद दिलाता है। यह दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब नैतिकता पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो मनुष्य कितना भयानक हो सकता है। यह कला का एक ऐसा रूप है जो आपको विचलित करता है ताकि आप व्यवस्था की बुराइयों के प्रति जागरूक हो सकें। इसका । हालांकि
अक्सर दर्शक पूछते हैं कि क्या इसका हिंदी डब (Hindi Dubbed) वर्जन मौजूद है? असल में, 'सालो' एक आर्ट-हाउस और पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है। इसकी ग्राफिक सामग्री और अत्यधिक हिंसा के कारण इसे मुख्यधारा के सिनेमाघरों या भारतीय टीवी चैनलों पर कभी नहीं दिखाया गया। इसलिए, इसका । हालांकि, कई ओटीटी प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स पर यह हिंदी सबटाइटल (Hindi Subtitles) के साथ उपलब्ध हो सकती है। an openly gay Marxist
अपनी अत्यधिक हिंसा और परेशान करने वाली विषयवस्तु के कारण, यह फिल्म दुनिया के कई हिस्सों में दशकों तक प्रतिबंधित रही। निर्देशक की विरासत: