जब नीलम ने नौकरी स्वीकार की, घर में धीरे-धीरे दरारें आने लगीं। सूर्य के साए जैसे छोटे-छोटे इशारे—खाने की ट्रे ठीक जगह पर नहीं रखना, पूजा के समय नीलम का दफ्तर के दस्तावेज़ देखना—बड़े झगड़ों में बदल गए। निर्मला की आशंका यह थी कि बहू अगर बाहर काम करेगी तो "घर की आत्मा" कमजोर पड़ जाएगी। हरिदास चुप रहते, पर उनकी आंखों में चिंता रहती।
"दादी, दादा जी, यह तुलसी मैं अपने साथ लाई हूँ।" उसने मीठी आवाज़ में कहा। m antarvasna saas sasur aur bahu hindi story com
Ramprasad dono ke beech mein rehte hue unhein samjhota karne ki koshish karte the. Ve dono ko samjhate the ki ve dono ek dusre ke saath milkar rahna chahiye. m antarvasna saas sasur aur bahu hindi story com